January 15, 2026

🌸 भाग 1 : बचपन का रिश्तागाँव के छोटे से स्कूल में शैलेश और वैशाली पहली बार मिले थे। दोनों साथ बैठते, साथ पढ़ते और हर छोटे-बड़े काम में एक-दूसरे का साथ निभाते। वैशाली हमेशा कहती –“शैलेश, एक दिन हम बड़े होकर ज़रूर कुछ बड़ा करेंगे।”शैलेश मुस्कुराकर जवाब देता – “हाँ, पर चाहे मैं जहाँ भी रहूँ, तू मेरे साथ होगी।”

उनकी दोस्ती धीरे-धीरे मासूम मोहब्बत में बदल गई। 💕गाँव की पगडंडियों पर चलते-चलते, बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर बातें करते हुए, दोनों ने अनजाने में ही सपनों का संसार बुन लिया था।


🌸 भाग 2 : मोहब्बत की कसमेंसमय गुज़रा। कॉलेज की पढ़ाई के बाद शैलेश शहर चला गया नौकरी के लिए। वैशाली वहीं गाँव में अपने परिवार की ज़िम्मेदारियों में बंधी रही।लेकिन हर रात दोनों की चिट्ठियाँ मिलतीं। 📩

“तेरे बिना यहाँ की रौनक अधूरी लगती है…” शैलेश लिखता।“तू लौट आएगा तो ये अधूरी ज़िंदगी पूरी हो जाएगी…” वैशाली जवाब देती।

दोनों ने कसमें खाईं – चाहे कितनी भी मुश्किल आए, वे साथ रहेंगे।


🌸 भाग 3 : किस्मत की मारलेकिन किस्मत को कुछ और मंज़ूर था। 😔शैलेश की नौकरी के शहर में उसका एक्सीडेंट हो गया। कई महीनों तक अस्पताल में रहा। इस दौरान उसकी चिट्ठियाँ वैशाली तक नहीं पहुँचीं।

उधर गाँव में अफवाहें उड़ने लगीं –“शैलेश अब वापस नहीं आएगा।”वैशाली का परिवार दबाव बनाने लगा कि वह शादी कर ले।

वैशाली ने रोते हुए कहा – “मैं शैलेश के सिवा किसी और की नहीं हो सकती।”लेकिन समाज और परिवार ने उसकी एक न सुनी। मजबूरी में उसकी शादी कर दी गई।


🌸 भाग 4 : अधूरी मोहब्बतसालों बाद शैलेश ठीक होकर गाँव लौटा। पर जब उसने वैशाली के आँगन में किसी और की शादी की तस्वीरें देखीं, उसका दिल टूट गया। 💔

वह रात भर बरगद के पेड़ के नीचे बैठा रहा।“काश मैं पहले लौट आता… काश उसे एक आख़िरी बार बता पाता कि मैं ज़िंदा हूँ।”

उसने आँसुओं में भीगा एक ख़त लिखा –

> “वैशाली,अगर तुझसे दूर रहना ही मेरी किस्मत है, तो मैं तुझे दुआएँ ही दे सकता हूँ।तू जहाँ भी रहे, खुश रह… क्योंकि मेरी मोहब्बत तेरे लिए कभी कम नहीं होगी।”

ख़त लिखकर उसने वही बरगद के पेड़ के नीचे रख दिया, जहाँ से उनकी मोहब्बत शुरू हुई थी।


🌸 भाग 5 : बरसों बादबरसों बीत गए। वैशाली बूढ़ी हो चुकी थी। एक दिन बरगद के पेड़ के पास गई तो उसे वही ख़त मिला। उसने काँपते हाथों से पढ़ा और आँसू बह निकले।

उसने आसमान की ओर देखा और कहा –“शैलेश… तूने जो चाहा, मैं हमेशा तेरे दिल में रही। पर तू यह जान ले… मेरी ज़िंदगी भले किसी और के नाम हुई हो, मेरा दिल सिर्फ़ तेरा था… और हमेशा तेरा ही रहेगा।”

हवा चली… बरगद के पत्ते झूम उठे… और शायद वहीं कहीं शैलेश की आत्मा मुस्कुरा उठी। 🌌


🌺 कहानी का सार

यह कहानी मोहब्बत की है, जो अधूरी रहकर भी पूरी लगती है। सच्चा प्यार कभी ख़त्म नहीं होता… वह दिल की गहराइयों में हमेशा जिंदा रहता है। ❤️

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