January 15, 2026

हर शाम बालकनी में बैठी होती हूं, ☕ चाय का प्याला हाथ में लिए,और उस ढलते सूरज के साथ… तेरी याद भी मेरे पास आ बैठती है। 🌅💓

वो चुपचाप गली से गुजरता है,धीरे से नज़रें चुराकर… एक झलक मेरी ओर देखता है,और फिर किसी दीवार की ओट में छिप जाता है — जैसे कोई मासूम सा बच्चा आंख मिचोली खेल रहा हो। 🙈😄

कभी-कभी तो ऐसा लगता है जैसे वो चाहता है कि मैं उसे देखती रहूं…उसकी आँखों में छुपी वो शरारत, 💫जैसे कह रही हो — “मैं गया नहीं, यहीं हूँ…” ❤️

आज जाते हुए जब उसने फिर से पलट कर देखा,मैंने मुस्कुरा कर कहा — “ज़रा ठहरो…”वो थोड़ा सा शरमा गया, फिर हल्की मुस्कान देकर आंखें झुका ली। 😊🌸

मैंने कुछ पल ठहर कर इंतज़ार किया…क्योंकि दिल को यकीन था — वो फिर से पलटेगा। 💌

और जब उसने गर्दन उठाकर मेरी ओर देखा,मैंने जल्दी से पूछा –

“क्या अच्छा लगता है तुम्हें हर शाम मुझे अकेले छोड़कर चले जाना?” 😔

“तुम्हें देखने ही तो आती हूं मैं हर रोज़, बस इस एक पल के लिए…” 🫶

उसने कुछ नहीं कहा, बस थोड़ी देर मुझे देखता रहा —लेकिन उसकी आंखों में साफ़ था जवाब…💬 “अच्छा लगता है हर सुबह फिर लौटकर आना…जब तुम यहीं बैठी मिलती हो, उसी बालकनी में,चाय का प्याला लिए, मेरी राह तकती हुई…” 💖🌤️

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